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युसमर्ग — जहाँ Iesous ने चाय बनाई थी
पहाड़ चढ़ते-चढ़ते एक बुज़ुर्ग औरत रुकी।
उसने चारों तरफ देखा। पहाड़, घाटी, एक छोटा-सा घर जिसकी चिमनी से धुआँ उठ रहा था। और कुछ — कुछ जाना-पहचाना।
“यहाँ मैं पहले आई हूँ,” उसने सोचा। “लेकिन कब?”
घर का दरवाज़ा खुला। एक बूढ़ी औरत, पीठ झुकी हुई, निकली।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
“यह जगह क्या कहलाती है?” मारीया ने पूछा।
“युसमर्ग,” उसने कहा। “पवित्र जगह है। भगवान येसु ने यहाँ उपदेश दिया था। उनके साथ एक जवान लड़की थी — श्रीनगर की। उन्होंने नदी में खड़े होकर शिक्षाएँ दीं। यहाँ आज भी तीर्थयात्री आते हैं।”
मारीया के गले में कुछ अटक गया।
“भगवान येसु?” उसने कहा। “वह युवा लड़की…”
बुज़ुर्ग औरत ने उन्हें गहराई से देखा। और फिर, धीरे से बोली — “हाँ… और उन्होंने तुम्हारे लिए चाय बनाई थी — तुम्हारे मासिक के लिए — मेरे पिता के घर में। यहाँ। हाँ।”
दोनों बूढ़ी औरतें हँसीं। और रोईं। और गले लगीं।
उस जगह का नाम था युसमर्ग — Lord Yesu की घाटी। आज भी, काश्मीर के नक्शे पर, वह जगह वहीं है।
वापसी — और वह काम जो बाकी था
दशकों बीत चुके थे।
मारीया — जो अब माता मारीया कहलाती थीं, जिन्हें हज़ारों लोग जानते थे, जिनके पाँव छूने के लिए लोग मीलों चलकर आते थे — वह वापस काश्मीर लौट रही थीं।
लेकिन वह वापसी किसी विजेता की नहीं थी।
वह वापसी थी — एक आत्मा की, जो जानती थी कि उसका काम लगभग पूरा हो गया है। और जो एक आखिरी काम करना चाहती थी — उसी शहर में, जहाँ उसकी कहानी शुरू हुई थी।
श्रीनगर। वही मठ। वही वेश्यालय।
उसने अपनी साथी Ruth से कहा — “कल हम शहर में जाएंगे। वेश्यालयों में।”
“क्यों, माँ? हमने पहले कभी ऐसा नहीं किया।”
“उनके लिए नहीं — मेरे लिए। मुझे खुद पर काम करना है। इस शहर के साथ शांति बनानी है।”
यह था मारीया का स्वभाव — जो खुद ठीक हो जाती, वह दूसरों को ठीक कर सकती थी। जो अपने अंधेरे को पूरी तरह देख चुकी हो, वही दूसरों के अंधेरे में दीपक जला सकती है।
वह बातचीत — वेश्यालय में
Siphor — एक पुराना सेनापति, जो अब Wayist था — ने इंतज़ाम किया।
पचास औरतें आईं। वेश्यालय से। उनकी आँखों में वह संदेह था जो मारीया ने बरसों पहले खुद में देखा था।
एक रिंगलीडर ने पहला सवाल पूछा — “तुम अपना नाम ‘मारी’ क्यों रखती हो? यह तो बुरा नाम है — मतलब होता है मृत्यु, बीमारी। कोई अपने बच्चे को यह नाम नहीं देता।”
मारीया ने रुककर जवाब दिया — “जब मेरे पिता ने मुझे बेचा, तो उन्होंने वेश्यालय को सिर्फ ‘मारी’ नाम बताया — मेरा पूरा नाम नहीं। मैं खुद को बुरा समझती थी, इसलिए वही नाम रख लिया।”
“और पूरा नाम?” किसी ने पूछा।
“मारीया। जिसका अर्थ है — प्रेम के देवता की।”
कमरे में चुप्पी छा गई।
“वह नाम कब मिला?” किसी ने धीरे से पूछा।
“जब मैं तैयार हुई अपने दिल में। एक सपने में। उस रात जब मेरे प्रभु ने मुझे उस नाम से बुलाया।”
पीछे से एक मीठी आवाज़ आई — “मारीया का अर्थ है — वह जो प्रेम के ईश्वर की है।”
कुछ आँसू पोंछे गए।
मारीया जानती थी — बर्फ पिघल गई है। उनके पास एक घंटा था। उन्होंने काम शुरू किया।
वह सुबह — जब श्रीनगर में कुछ बदल गया
हज़ारों लोग Dal Lake के किनारे इकट्ठा हुए थे।
सूर्योदय के समय — जब झील पर कमल खिल रहे थे, गुलाबी और सफेद — माता मारीया पालकी में आईं।
भीड़ ने चारों तरफ से घेर लिया। लोग जप कर रहे थे —
mārgadarśaka mata śrī Mārīya
वह जो मार्ग दिखाती हैं — माता श्री मारीया।
Ruth — उनकी युवा साथी — भीड़ में खड़ी थीं। उन्होंने देखा, सोचा — “यहाँ वह कितनी प्रसिद्ध हैं।”
उस रात — एक बड़ी सभा हुई।
वह रात जो काश्मीर ने कभी नहीं भुलाई
क्या हुआ उस रात — इसका पूरा विवरण Wayist परंपरा में है।
इतना कहना काफी है —
हज़ारों लोग थे उस रात।
और सुबह — बहुत से लोग नहीं थे।
श्रीनगर में खलबली मच गई। परिवारों ने पुलिस में शिकायत की। अचानक इतने लोग कहाँ गए? Siphor और उनके मित्र पुलिस स्टेशन गए, कहा — “सभी वेश्याएँ पहले ही वापस भेज दी थीं।”
लेकिन वेश्यालय की औरतों ने गवाही दी — “वे पिछले दो हफ्तों से बदल गई थीं। भजन गाती थीं। ध्यान करती थीं। माता मारीया से मिलने के बाद से। और अब — वे सब चली गईं। ज़रूर स्वर्ग गई होंगी।”
Ruth ने Siphor से पूछा — “क्या यह ठीक था? चोरी नहीं थी यह?”
Siphor ने कहा — “प्रभु ने खुद यही शुरू किया था।”
Ruth ने कहा — “नहीं। मठ ने मारी के लिए पैसे दिए थे।”
Siphor ने कहा — “नहीं। मठ ने मालिक से कहा था — यह उसके कर्म-पुण्य का दान है।”
Ruth ने कहा — “उफ़… मर्द!”
तारा — वह जो अब भी मार्ग दिखाती हैं
Wayist परंपरा में — मारीया की कहानी यहाँ खत्म नहीं होती।
वह अब दिव्य तारा हैं — सुखावती में। वह पहली तारा जो इस नए आयाम में प्रशिक्षित हुईं, जो दूसरों को तारा बनने की शिक्षा देती हैं।
तारा — वह जो एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाती है।
और काश्मीर के नक्शे पर — युसमर्ग आज भी है। Lord Yesu की घाटी।
वहाँ के पत्थरों में, वहाँ की हवा में — एक जवान लड़की की कहानी बसी है। जिसे एक दिन एक अजनबी ने फर्श पर बैठकर देखा था — और कहा था:
“तुम किसी की संपत्ति नहीं हो। कभी नहीं थीं।”
वह लड़की — माता मारीया बनी।
और यह रास्ता — जो उसने चला, जो उसने सिखाया — यही है तितली-मार्ग।
कैटरपिलर का विघटन। तितली का जन्म।
सबसे अंधेरी जगह से — सबसे चमकीला प्रकाश।
ॐ तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा।
इस पूरी श्रृंखला का स्रोत: From Indian Brothels to Divine Guide — Jean Prieur du Plessis, Adéle du Plessis।
अगली श्रृंखला: माता मारीया की कविताएँ — Kaori Mizuki के संग्रह से।