Mariya-Series
श्रृंखला के बारे में
एक भारतीय लड़की। मगध साम्राज्य। एक वेश्यालय। और वह मुलाकात जिसने इतिहास की दिशा बदल दी।
माता मारीया मगधालेने — जिन्हें पश्चिम ने Mary Magdalene कहा — असल में एक भारतीय Wayist गुरु थीं। उनके बिना न theWAY वही होता जो है, न ईसाई धर्म — चाहे वह स्वीकार करे या न करे।
यह चार-भाग की श्रृंखला उनकी कहानी है।
नाम, पहली मुलाकात, और वह निमंत्रण जिसने सब बदल दिया।
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एक गलत नाम से शुरू होती है कहानी
ईसाई बाइबल में एक किताब है — “Gospel of John”।
यह नाम सबको पता है। लेकिन जो नाम कम लोग जानते हैं — वह यह है कि यह किताब मारीया ने लिखी थी।
उस मारीया ने — जो मगध से आई थी। जो Iesous के साथ काश्मीर से जेरूसलम तक गई। जिसने अपनी आँखों से वह सब देखा जो बाकी कोई न देख सका।
वह नाम जो इतिहास ने छुपा लिया
दुनिया उसे Magdalene के नाम से जानती है।
लेकिन यह नाम न गलील (Galilee) के किसी गाँव का है, न हिब्रू भाषा का। यह नाम है — मगधालेने — अर्थात, मगध की रहने वाली।
मगध। वही प्राचीन भारतीय साम्राज्य, जहाँ बुद्ध ने ज्ञान पाया था। जहाँ से मौर्य वंश ने पूरे उपमहाद्वीप को एक सूत्र में पिरोया था। वही भूमि, जहाँ एक छोटी-सी लड़की का जन्म हुआ — जिसका नाम था मारीया।
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युसमर्ग — जहाँ Iesous ने चाय बनाई थी
पहाड़ चढ़ते-चढ़ते एक बुज़ुर्ग औरत रुकी।
उसने चारों तरफ देखा। पहाड़, घाटी, एक छोटा-सा घर जिसकी चिमनी से धुआँ उठ रहा था। और कुछ — कुछ जाना-पहचाना।
“यहाँ मैं पहले आई हूँ,” उसने सोचा। “लेकिन कब?”
घर का दरवाज़ा खुला। एक बूढ़ी औरत, पीठ झुकी हुई, निकली।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
“यह जगह क्या कहलाती है?” मारीया ने पूछा।