Srinagar

वापसी — और वह रात जो काश्मीर ने कभी नहीं भुलाई

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युसमर्ग — जहाँ Iesous ने चाय बनाई थी

पहाड़ चढ़ते-चढ़ते एक बुज़ुर्ग औरत रुकी।

उसने चारों तरफ देखा। पहाड़, घाटी, एक छोटा-सा घर जिसकी चिमनी से धुआँ उठ रहा था। और कुछ — कुछ जाना-पहचाना।

“यहाँ मैं पहले आई हूँ,” उसने सोचा। “लेकिन कब?”

घर का दरवाज़ा खुला। एक बूढ़ी औरत, पीठ झुकी हुई, निकली।

दोनों ने एक-दूसरे को देखा।

“यह जगह क्या कहलाती है?” मारीया ने पूछा।