Tara

जब भारत ने theWAY को अपनी भाषा में गाया — भक्ति आंदोलन की Wayist जड़ें

एक धागा — जो हज़ार साल तक खिंचता रहा

भक्ति आंदोलन के बारे में इतिहास की किताबें कहती हैं — यह बारहवीं-तेरहवीं सदी में शुरू हुआ।

लेकिन MahaMarga की दृष्टि से — यह आंदोलन उस पहले बीज का फूल था, जो पहली सदी में बोया गया था।

काश्मीर में। एक Wayist Sangha में। उस समय जब Thomas Didymus — Iesous के शिष्य — राजा Gondophares के दरबार में बैठकर एक नई दुनिया का स्वप्न देख रहे थे। जब माता मारीया मगधालेने की शिक्षाएँ व्यापार-मार्गों पर फैल रही थीं — काश्मीर से जमशेदपुर तक, अरब से इथियोपिया तक।

वापसी — और वह रात जो काश्मीर ने कभी नहीं भुलाई

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युसमर्ग — जहाँ Iesous ने चाय बनाई थी

पहाड़ चढ़ते-चढ़ते एक बुज़ुर्ग औरत रुकी।

उसने चारों तरफ देखा। पहाड़, घाटी, एक छोटा-सा घर जिसकी चिमनी से धुआँ उठ रहा था। और कुछ — कुछ जाना-पहचाना।

“यहाँ मैं पहले आई हूँ,” उसने सोचा। “लेकिन कब?”

घर का दरवाज़ा खुला। एक बूढ़ी औरत, पीठ झुकी हुई, निकली।

दोनों ने एक-दूसरे को देखा।

“यह जगह क्या कहलाती है?” मारीया ने पूछा।